हज़रत इमाम मेंहदी आ स और क़ुरान. (उलमाये अहले सुन्नत )बाबे 1

हज़रत इमामे मेंहदी अ  स और उलमाये अहले सुन्नत 
रवायत नो 1 जनाबे सईद इब्ने जबीर ने आये करीमा. (लेयुज़हेरा अलाद्दीने कुल्लेही वालो व्लो करेहल मुशरेक़ून )
"ताकि उसे तमाम (दीनो )पर ग़ालिब करें अगर चे मुशरेक़ीन बुरा ही क्यों ना माने .
जनाब शेख सलमानी कंद वाज़ी हनफ़ी (वफ़ात 1293 हिजरी )ने अपनी गरह क़द्र किताब यानबिउल मुवाददाता का 71 वाह बाब इन आयेतो से मख़सूस किया है जिसकी तवीलो तफ़्सीर hazryहज़रत इमामे मेंहदी अ स से की जाती है. 

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