शबे शहादते इमाम मुसा काज़िम आ स

                                                शबे शहादते इमाम मुसा काज़िम आ स 
 
 इमाम मूसा काज़िम आ स पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा आ स के छटे जानशीन और इस्मते की आठवीं कड़ी है। अप्प के वालिद माजिद हज़रत मोहम्मद बाक़िर ा स थे और वालिदा जनाबे उम्मे फरवा बिन्ते कासिम इब्ने मोहम्मद अबी बक्र थी।
आप अपने अबाउओ अजदाद की  तरह इमामे मंसूर 'मासूम बा इल्मे ज़माना और अफ़ज़ल कायनात थे
अल्लामा एब्ने हजर  लिखते है की इमामे जाफ़रे जाफ़रे सादिक़ अफ्ज़लो अकमल थे। इसी बना पे बेना पे अप्प खलीफा और वासी क़रार पाए।
अल्लामा  इब्ने खाकान तहरीर फरमाते है की आप सादाते अहलेबैत से  थे व खलीफा { अश्हराने यज़कृ }इन की फ़ज़ीलत और इनका फ़ज़्लो करम मुहताजे बयां नहीं है।
इमाम फ़ख़रुद्दीन राज़ी की तफ़्सीरे कबीर जींद 5 में सफह ४२९ व  जिल्द ६ सफह ७८३ तबा मिस्र बा हवाला आये  तत्हीर  और आफीफ समदानी अली हमदानी की मवद्दते क़ुर्बा सफह ३४ तबे मुंबई १३१०  शाह अब्दुल अज़ीज़ आशरये तान १३ ४३९ तबे लखनव १३०९ हिजरी इबारत  से ये मुस्तफ़ाद होता हगाई होता है ज़ाहिर होता  की आप भी अपने आबओ अजदाद की तरह मासूम  महफूज़ थे।
इमामे मूस काज़िम आ  स बेसहारो  दर्दमंदों मुफ़लिसों  नदार यतीम सब के लिए बईसे रहमत थे
इनके इल्म से इल्म  दुनया आज भी फ़ायदा उठा रही है
मगर अफ़सोस की उसे  को मालून हारुन रशीद  अब्बासी ने ज़हर  से  शहीद कर  दिया /




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