फ़ाज़िलाते क़ुरान

माहे रमज़ान और फ़ज़ीलते क़ुरान 

  क़ुरान अल्ल्हा की वाह अज़ीम कितना है जिसे जितना इंसान तिलावत करता है उसे उतना सुकून इल्म दिल की ठंडक रोशनी हिदायत मार्फत अता होती है... क़ुरान का पड़ना सुनना देखना सब बाइसे फ़ज़ीलत है. 

रसूले खुदा ने फ़रमाया का फरमान है की अगर तुम पर कोई अम्र मानींद शबे तरीक मशकूक ओ मुश्तबा हो तो क़ुरान का मुनव्वर तरीन चिराग तुम्हारे लिए ईशतेबा के दूर करने को काफ़ी है. 

ये मुजादेला (लड़ाई खु रेज़ी )मे कामयाब करने वाला मसाएल मे मंज़िले तस्दीक़ तक पहुँचाने वाला जन्न्त की सही राह दिखाने वाला ग़ाफ़िके क़ुरआन को जहन्नम मे ले जाने वाला. ये बेहतरीन रहनुमा है और रहबर है.ये वाह किताब है जिसमे तमाम अहकामात की तफ्सील और बयान है. इसमें दो क़िस्म के अहकाम है. ज़ाहिर बातिन. इसका ज़ाहिर अहकाम अहकामे अलाही से मम्लू और इसका बातिन उलूमे ला इम्तेनाही से पुर है. ज़ाहिर खुश आईंंद है और बातिन अमीक़. इसके कुछ नाजूमो कवाकिब है जो इसके रहबर व रहनुमा है और इस नजूम के कुछ और नजूम है यानी आईम्मा ताहेरीन जो गुमराहियो को राहें रास्त पे लगाते है. इन्ही के पास इल्मे क़ुरआन है इन्ही से इल्म हासिल किया जा सकता है यही उस को लोगो तक पहुंचाने वाले है सूरए बरात कह रहा है इसको रसूल पहुंचा सकता है ya नफ़्से रसूल 

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