फ़ज़ीलते हामिलाने क़ुरान

                   फ़ज़ीलते हामिलाने क़ुरान
माहे रमज़ानुल मुबारक जसमे इंसान के  सारे गुनाह अल्ल्हा मुआफ़ कर देता है. अल्ल्हा इस महीने मे रहमत के दरवाज़े वा कर देता है. और ज़ब कोई क़ुरान की तिलावत कर ता है तो अल्ल्हा अपने बंदे से गोया गुफ़्तगू करता है.
इसी सिलसिले से रसूले खुदा ने फ़रमाया है की...
मेरी उम्मत के अशराफ और बुज़ुर्ग वो लोग है जो हामिलाने क़ुरान और इबादत मे शब्बेदार है.
हामिलाने क़ुरान अहले बहिश्त के बुज़ुर्ग है.

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