अगर आयतुल्ल्हा सिस्तानी ना होते तो इराक की आज़ादी ना मुमकिन थी. हशदुश शअबी

अगर आयतुल्लाह सीस्तानी का फ़तवा न आया होता तो इराक को आज़ाद कराना संभव नहीं था देश पर दूसरों का क़ब्ज़ा होता और हम इराक का परचम लहराने में सक्षम न होते ।

विलायत पोर्टल : प्राप्त जानकारी के अनुसार वहाबी आतंकवाद और आतंकी संगठन आईएसआईएस पर जीत की दूसरी वर्षगांठ मना रहे इराक की शक्तिशाली स्वंयसेवी सेना और आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में प्रभावी भूमिका निभाने वाली हश्दुश शअबी के उपप्रमुख ने कहा कि अगर मरजईयत न होती तो देश शत्रुओं के हाथों में पड़ जाता।

हश्दुश शअबी के उप प्रमुख अबू महदी मोहंदिस ने कहा कि अगर मरजईयत न होती तो देश पर बेगानों का क़ब्ज़ा होता, अगर आयतुल्लाह सीस्तानी का फ़तवा न आया होता तो इराक को आज़ाद कराना संभव नहीं था देश पर दूसरों का क़ब्ज़ा होता और हम इराक का परचम लहराने में सक्षम न होते ।

अबू महदी ने कहा कि अगर आईएसआईएस के विरुद्ध फतवा न आया होता तो हम दाइश को पराजित करने में सफल न होते और आज यह जीत का समारोह न मना रहे होते ।

इराक के भूतपूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल मालेकी ने एक अन्य समारोह में कहा कि मरजईयत के फतवे और देश की जनता के बलिदान ने इराक को विभाजित करने की साज़िश पर पानी फेर दिया और दाइश जैसे फ़ितने को ख़त्म कर दिया

अगर आयतुल्लाह सीस्तानी का फ़तवा न आया होता तो इराक को आज़ाद कराना संभव नहीं था देश पर दूसरों का क़ब्ज़ा होता और हम इराक का परचम लहराने में सक्षम न होते ।

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