फ़िलिस्तीनी रॉकेटों और इस्राईली आयरन डोम के टकराव में कौन किस पर भारी? विशेषज्ञों की राय क्या है?

 



इस्राईल और ग़ज्ज़ा के बीच जारी लड़ाई में सबसे ज़्यादा ध्यान अगर किसी चीज़ ने अपनी ओर खींचा है तो वह है फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधी गुटों द्वारा रॉकेटों की बारिश और उनका मुक़ाबला करने वाला इस्राईल का एंटी मिसाइल सिस्टम आयरन डोम।

इस दौरान ग़ज्ज़ा स्थित फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधी गुटों ने क़रीब 3,000 रॉकेट इस्राईली ठिकानों पर फ़ायर किए हैं। हालांकि इनमें से अकसर अन-गाइडेड मिसाइल थे, इसके बावजूद उनमें से सैकड़ों रॉकेट आयरन डोम को ग़च्चा देने में सफल रहे और उन्होंने इस्राईली शहरों और कारख़ानों में भारी तबाही मचाई।

आयरन डोम की क्षमता के बारे में विशषज्ञों की अलग-अलग राय है, कुछ इसे बहुत ही सफल एंटी मिसाइल सिस्टम बताते हैं, तो कुछ अन्य की राय में इसकी मारक क्षमता ज़्यादा नहीं है, ख़ास तौर पर इसकी असली परीक्षा उस वक़्त होगी, जब इसे आधुनिक गाइडेड मिसाइलों का सामना करना पड़ेगा।

पश्चिमी मीडिया द्वारा आयरन डोम की तारीफ़ों में पुल बांधने के बावजूद, पिछले हफ़्ते से जारी लड़ाई के दौरान इस्राईल में सभी मौतें, फ़िलिस्तीनी रॉकेट हमलों के कारण हुई हैं।

वहीं इस सिस्टम की वकालत करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह नहीं होता तो इस्राईल में मौतों का आंकड़ा कहीं ज़्यादा होता और बड़े पैमाने पर तबाही होती।

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