उच्च न्यायालय ने राज्य के अन्य कॉलेजों के साथ मदरसों में उर्दू, अरबी और फारसी शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा की मांग वाली एक याचिका को खारिज कर दिया है।

 उच्च न्यायालय ने राज्य के अन्य कॉलेजों के साथ मदरसों में उर्दू, अरबी और फारसी शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा की मांग वाली एक याचिका को खारिज कर दिया है। उच्च न्यायालय के वकील शहर नकवी की ओर से दायर जनहित याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश राजेश बुंदल और न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ ने यह मंजूरी दी। याचिकाकर्ता ने इससे पहले इस संबंध में उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की थी, जिसे उसने फिर से याचिका दायर करने के लिए अदालत से अनुमति लेने के बाद वापस ले लिया। उक्त मुद्दे पर पुन: याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता शहर नकवी का कहना है कि पटना या दो मुस्लिम युवक मदरसों में केवल उर्दू, अरबी और फारसी का अध्ययन। बानी को आधुनिक शिक्षा की जरूरत है जो अन्य कॉलेजों में दी जा रही है ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जा सके, कुछ नहीं मिलेगा। गौरतलब है कि राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष गोल ने कोर्ट को बताया था कि मदरसों में सचिव मौलवी. और आलम की शिक्षा यूपी बोर्ड के जूनियर हाई स्कूल, हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के बराबर है। कोर्ट ने मदरसों में सरकार द्वारा दी जाने वाली शिक्षा और इससे जुड़े कानूनी पहलू की ओर भी ध्यान दिलाया। कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जनहित याचिका को सुनते हुए  खारिज कर दिया गया.


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